जानिए पाइल्स और फिशर में क्या फर्क होता है और इसके लक्षण व कारण और इलाज आऐ इस आर्टिकल में आसान भाषा में सरल तरीके से समझाया गया है .
पाइल्स और फिशर नाम सुनते ही डर चालू
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि पाइल्स और फिशर एक ही बीमारी है पर सच्चाई तो यह है कि दोनों अलग-अलग problem हैं हां पर दोनों का रिश्ता टॉयलेट जाने के experience से जरूर जुड़ा होता है पर इनके लक्षण व कारण और इलाज काफी अलग होते हैं.
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1. सबसे पहले जानिए Piles क्या होता है
Piles यानी बवासीर में आपके मलद्वार (anus) के आसपास की veins (नसें) सूज जाती हैं और यह सूजन अंदर भी हो सकती है और बाहर भी और इसे internal और external piles कहा जाता हैं.
Piles के common symptoms:
- टॉयलेट करते समय खून आना
- गुदा के पास मांस जैसा कुछ बाहर आ जाना
- जलन और खुजली
- बैठने में discomfort
Piles क्यों होता है?
- लगातार कब्ज रहना
- ज्यादा देर तक टॉयलेट पर बैठना
- pregnancy
- वजन उठाना
- मसालेदार खाना ज्यादा खाना
2. अब समझिए – Fissure क्या होता है?
Fissure मतलब गुदा की skin में छोटा सा cut या चीर पर जब बहुत ज्यादा सख्त या बड़ा stool पास होता है तब यह कट लग जाता है.
Fissure के common symptoms:
- टॉयलेट के समय तेज कटने जैसा दर्द
- टॉयलेट के बाद भी दर्द बना रहना
- खून की कुछ बूंदें
- गुदा में जलन या सूजन
Fissure क्यों होता है?
- कब्ज और सख्त मल
- बार-बार diarrhea
- ज्यादा मसाले वाला खाना
- तनाव और low-fiber डाइट
3. अब समझिए Piles और Fisher में असली अंतर
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| Point | Piles (बवासीर) | Fissure (फिशर) |
|---|---|---|
| Problem | नसों की सूजन | स्किन में कट |
| दर्द | कम या हल्का | बहुत ज्यादा तेज |
| खून | bright red, टॉयलेट के बाद आता है | हल्का या धारीदार |
| मल के बाद फीलिंग | heaviness या itching | जलन और तीखा दर्द |
| ट्रीटमेंट | lifestyle changes, ointment, surgery | फाइबर डाइट, sitz bath, ointments |
4. दोनों में एक जैसी बातें भी हैं
- दोनों ही constipation से बिगड़ते हैं
- मसालेदार खाना खाने वालों को दोनों में से कोई भी हो सकता है
- सही इलाज और lifestyle से दोनों ठीक हो सकते हैं
5. इलाज में फर्क क्या है?
Piles का इलाज:
- फाइबर रिच खाना (जैसे दलिया, हरी सब्जियां)
- sitz bath
- डॉक्टर की सलाह से ointment या laser surgery
Fissure का इलाज:
- stool softener या laxative
- गुनगुना पानी (sitz bath) दिन में 2 बार
- local anesthetic creams
- chronic fissure हो तो surgery भी हो सकती है
6. कैसे बचें इन दोनों से
- दिन की शुरुआत गुनगुने पानी और नींबू से करें
- टॉयलेट देर तक न रोकें
- बैठने का तरीका ठीक रखें
- ज़्यादा तेल, मिर्च और मसाले से दूरी बनाएं
- रोजाना 30 मिनट की physical activity करें
7. कब जाएं डॉक्टर के पास?
अगर खून बार-बार आ रहा है और दर्द असहनीय है या कुछ बाहर निकलता नजर आ रहा है तो खुद से इलाज करने से अच्छा है किसी अच्छे proctologist से consult करें.







