kannauj Ground Report उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। एक साधारण सा खेल अचानक खौफनाक हादसे में बदल गया।
एक हाईस्कूल का छात्र अपने घर के बाहर गिल्ली-डंडा खेल रहा था। खेल के दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पास में खड़ी एक लंबी लाठी पर गिर गया।
गिरते ही लाठी सीधे उसके पेट में घुस गई और आरपार निकल गई। यह दृश्य इतना डरावना था कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ पल के लिए सन्न रह गए। किसी को समझ नहीं आया कि आखिर अचानक यह क्या हो गया। बच्चे की हालत देखकर तुरंत परिवार को खबर दी गई।
हादसे के बाद परिवार वालों ने घबराने के बजाय समझदारी दिखाई। उन्होंने तुरंत छात्र को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। पहले उसे तालग्राम ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर देखते हुए तुरंत बड़े अस्पताल रेफर कर दिया।
इसके बाद छात्र को कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद साफ कर दिया कि मामला बेहद नाजुक है और तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा। हर मिनट की देरी खतरे को और बढ़ा सकती थी।
डॉक्टरों के सामने थी बड़ी चुनौती
जब डॉक्टरों ने छात्र की हालत देखी, तो उन्हें समझ आ गया कि यह कोई सामान्य केस नहीं है। पेट के अंदर इतनी लंबी लाठी फंसी हुई थी, जिसे निकालना आसान नहीं था। जरा सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती थी।
डॉक्टरों ने पूरी टीम के साथ बैठकर योजना बनाई। उन्होंने तय किया कि लाठी को एक बार में खींचकर निकालना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे अंदरूनी अंगों को भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए उन्होंने इसे टुकड़ों में काटकर निकालने का फैसला लिया।
ऑपरेशन थिएटर में दिखी असली जंग
ऑपरेशन शुरू हुआ तो डॉक्टरों की टीम पूरी तरह सतर्क थी। सबसे पहले लाठी को ग्राइंडर की मदद से छोटे-छोटे हिस्सों में काटा गया। यह काम बेहद सावधानी से किया गया, ताकि शरीर के अंदर कोई और नुकसान न हो।
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करीब साढ़े चार घंटे तक यह ऑपरेशन चला। डॉक्टर एक-एक इंच करके लाठी को बाहर निकालते रहे। इस दौरान पूरी टीम का ध्यान सिर्फ एक ही बात पर था कि किसी भी तरह छात्र की जान बचानी है।
आखिरकार मिली सफलता
लंबे और मुश्किल ऑपरेशन के बाद आखिरकार डॉक्टरों को सफलता मिली। लाठी को पूरी तरह बाहर निकाल लिया गया। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था, क्योंकि इतनी गंभीर स्थिति में भी छात्र की जान बच गई। ऑपरेशन के बाद छात्र को कुछ दिनों तक निगरानी में रखा गया। धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार होने लगा। डॉक्टरों की मेहनत और सही फैसलों का ही नतीजा था कि वह अब खतरे से बाहर है।
अब कैसा है छात्र का हाल
करीब दो हफ्ते अस्पताल में रहने के बाद छात्र को छुट्टी दे दी गई। अब वह पहले से बेहतर है और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। परिवार के लिए यह किसी नए जीवन से कम नहीं है।
माता-पिता ने डॉक्टरों का धन्यवाद किया और कहा कि अगर समय पर सही इलाज नहीं मिलता, तो आज उनका बच्चा उनके साथ नहीं होता। यह सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं।






