प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनावात्रा ने एक नई कूटनीतिक ऊंचाई तय करते हुए दोनों देशों के संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दे दिया। यह फैसला BIMSTEC शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले बैंकॉक में हुई मुलाकात में लिया गया।
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बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा, साइबर अपराध, मानव तस्करी और व्यापार सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ‘Act East’ नीति और थाईलैंड की ‘Act West’ रणनीति को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि दोनों देश एक साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करेंगे।
मोदी ने चीन का परोक्ष जिक्र करते हुए कहा कि भारत ‘विस्तारवाद’ में नहीं, बल्कि ‘विकासवाद’ में विश्वास रखता है। उन्होंने ASEAN की एकता का समर्थन करते हुए, दोनों देशों द्वारा मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस दौरान, दोनों देशों के बीच डिजिटल तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप्स में सहयोग बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही, पूर्वोत्तर भारत और थाईलैंड के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए दो समझौते भी किए गए।
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प्रधानमंत्री मोदी ने थाईलैंड में हाल ही में आए भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत हरसंभव सहायता के लिए तैयार है। इसके अलावा, उन्होंने थाई सरकार द्वारा रामायण आधारित विशेष डाक टिकट जारी करने और त्रिपिटक ग्रंथ की भेंट के लिए आभार व्यक्त किया।
भारत और थाईलैंड के बीच व्यापार 2023 में 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। दोनों देशों ने पर्यटन, संस्कृति और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए वीज़ा नीति को आसान बनाने और डिजिटल पेमेंट कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की।
यह साझेदारी न केवल दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच कूटनीतिक संबंधों को नया आयाम देगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगी।
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