आगरा में राजनीतिक माहौल उस समय अचानक गर्म हो गया जब समान अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप शर्मा को लगातार दूसरे दिन भी पुलिस ने उनके घर पर ही नजरबंद रखा। यह मामला सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा दौरे से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते प्रशासन ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था के नाम पर सख्ती बढ़ा दी।
आगरा 26 जुलाई की इस घटना ने स्थानीय राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब कोई विरोध प्रदर्शन घोषित नहीं था, तो इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। वहीं पुलिस का पक्ष सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सावधानी बरतने का बताया जा रहा है।
दूसरे दिन भी घर पर तैनात रही पुलिस
25 जुलाई की सुबह करीब 10 बजे से ही पुलिस ने कुलदीप शर्मा के आवास और कार्यालय को घेर लिया था। उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। 26 जुलाई को भी हालात वैसे ही बने रहे। पुलिस के कई दरोगा और जवान लगातार मौके पर मौजूद रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुलिस की मौजूदगी इतनी ज्यादा थी कि आसपास का इलाका पूरी तरह से निगरानी में नजर आया। किसी भी बाहरी व्यक्ति की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही थी। इससे यह साफ हो गया कि प्रशासन इस मामले को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था।
मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़ा पूरा मामला
दरअसल 25 और 26 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगरा में कार्यक्रम प्रस्तावित था। इसी वजह से प्रशासन ने शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। ऐसे में किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि या विरोध प्रदर्शन की आशंका को पहले ही नियंत्रित करने की कोशिश की गई।
हालांकि समान अधिकार पार्टी का दावा है कि उन्होंने किसी भी प्रकार के विरोध का अल्टीमेटम नहीं दिया था। उनका कहना है कि वे सिर्फ एक ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते थे।
ज्ञापन देने का था कार्यक्रम
पार्टी के मुताबिक सुभाष पार्क में हुए 8 करोड़ रुपये के कथित घोटाले और राजपुर चुंगी स्थित धोबी बस्ती की जमीन पर भूमाफियाओं के कब्जे को लेकर वे मुख्यमंत्री को ज्ञापन देना चाहते थे।
इसके लिए पार्टी की ओर से 22 जुलाई को जिलाधिकारी आगरा को पत्र लिखकर समय मांगा गया था। उनका कहना है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत प्रशासन से अनुमति लेने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नजरबंद कर दिया गया।
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समान अधिकार पार्टी के नेताओं का कहना है कि जब उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की योजना बनाई थी, तो पुलिस की यह कार्रवाई समझ से परे है। उनका आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का अधिकार भी उनसे छीना जा रहा है।
कुलदीप शर्मा के समर्थकों ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन को किसी तरह की आशंका थी, तो बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता था। सीधे नजरबंदी जैसे कदम से लोगों में असंतोष बढ़ता है।






