Taj Mahal Free Entry ताजमहल उर्स की शुरुआत गुसल की रस्म से हुई. शाहजहां और मुमताज की असली कब्रें तीन दिन के लिए खोली गई हैं. उर्स के दौरान फ्री एंट्री
ताजमहल उर्स की शुरुआत, आगरा में बदला माहौल
Taj Mahal Free Entry आगरा के ताजमहल में एक बार फिर उर्स की रौनक देखने को मिल रही है. ताजमहल उर्स की शुरुआत गुरुवार सुबह गुसल की रस्म के साथ हो गई. 371वें उर्स के मौके पर वह परंपराएं निभाई जा रही हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं. संगमरमर की इस ऐतिहासिक इमारत में इन तीन दिनों के लिए आम दिनों से बिल्कुल अलग माहौल नजर आता है.
गुसल की रस्म से हुआ उर्स का आगाज
ताजमहल उर्स की शुरुआत गुसल की रस्म से की गई. मुख्य गुंबद के नीचे तहखाने में स्थित शाहजहां और मुमताज महल की असली कब्रें खोली गईं. कब्रों पर चंदन का लेप लगाया गया और फूलों की चादर चढ़ाई गई. ASI और उर्स आयोजन कमेटी के लोगों ने मिलकर यह रस्म पूरी की.
Taj Mahal Free Entry गुसल की रस्म को सम्मान और याद का प्रतीक माना जाता है. इसमें शांति और सादगी सबसे अहम होती है, इसलिए यह रस्म सीमित लोगों की मौजूदगी में निभाई जाती है.
क्या है गुसल की रस्म का मतलब
ताजमहल उर्स में गुसल की रस्म का खास धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. Taj Mahal Free Entry इस रस्म के जरिए कब्रों को प्रतीकात्मक रूप से पवित्र किया जाता है. चंदन, इत्र और फूलों का इस्तेमाल कर यह संदेश दिया जाता है कि मरने के बाद भी यादें और सम्मान जिंदा रहते हैं.
यह रस्म दिखावे से दूर रहती है और पूरी तरह आस्था पर आधारित होती है, यही वजह है कि ताजमहल उर्स का यह पल बेहद भावुक माना जाता है.
तीन दिन के लिए खुलीं शाहजहां और मुमताज की असली कब्रें
ताजमहल उर्स की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इन तीन दिनों के लिए शाहजहां और मुमताज की असली कब्रें खोली जाती हैं. आम दिनों में टूरिस्ट केवल ऊपर बनी प्रतीकात्मक कब्रें ही देख पाते हैं.
Taj Mahal Free Entry उर्स के दौरान तहखाने में जाकर असली कब्रों के दर्शन करने का मौका मिलता है. यह अनुभव हर किसी के लिए अलग होता है, क्योंकि यहां इतिहास को बेहद नजदीक से महसूस किया जा सकता है.
उर्स के दौरान टूरिस्ट के लिए फ्री एंट्री
Taj Mahal Free Entry ताजमहल उर्स में लोगों को बड़ी राहत दी गई है. पहले और दूसरे दिन दोपहर 2 बजे से फ्री एंट्री दी जा रही है. तीसरे दिन सुबह से शाम तक बिना टिकट ताजमहल में प्रवेश किया जा सकेगा.
फ्री एंट्री की वजह से बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले टूरिस्ट ताजमहल उर्स का हिस्सा बन पा रहे हैं. इससे आगरा में चहल पहल भी बढ़ गई है.
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17 जनवरी को होगा चादरपोशी का मुख्य आयोजन
ताजमहल उर्स का आखिरी दिन 17 जनवरी को होगा. इस दिन चादरपोशी की मुख्य रस्म अदा की जाएगी. उर्स आयोजन कमेटी की ओर से 1720 मीटर लंबी सतरंगी चादर चढ़ाई जाएगी.
Taj Mahal Free Entry इस चादर को सर्व धर्म सद्भाव की प्रतीक माना जाता है. चादर दक्षिणी गेट स्थित हनुमान मंदिर से निकाली जाएगी, जिसमें अलग अलग धर्मों के धर्मगुरु शामिल होंगे. यह दृश्य अपने आप में एक मजबूत संदेश देता है.
कुलशरीफ, कुरानख्वानी और फातिहा की रस्म
उर्स के अंतिम दिन सुबह कुलशरीफ, कुरानख्वानी और फातिहा पढ़ी जाएगी. इसके बाद पूरे दिन चादरपोशी और पंखा चढ़ाने की रस्म चलती रहेगी.
Taj Mahal Free Entry उर्स कमेटी के अध्यक्ष ताहिरउद्दीन ताहिर के मुताबिक हर दुआ में देश की खुशहाली, अमन और तरक्की की कामना की जाती है. ताजमहल उर्स का मकसद केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि लोगों के दिलों को जोड़ना भी है.
हर धर्म के लोग बनते हैं ताजमहल उर्स का हिस्सा
Taj Mahal Free Entry ताजमहल उर्स की सबसे खास बात यही है कि इसमें हर धर्म के लोग शामिल होते हैं. कोई इसे धार्मिक आस्था से जोड़ता है तो कोई इसे सांस्कृतिक आयोजन मानता है.
तीन दिनों तक ताजमहल का माहौल अलग ही रंग में नजर आता है. कहीं दुआ की आवाज सुनाई देती है, तो कहीं लोग खामोशी से संगमरमर की खूबसूरती को निहारते दिखते हैं.
ताजमहल उर्स क्यों माना जाता है खास
ताजमहल उर्स सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है. यह उस साझा संस्कृति और इंसानियत की याद दिलाता है, जिस पर भारत की पहचान टिकी हुई है.
जब शाहजहां और मुमताज की कब्रों पर चादर चढ़ाई जाती है, तो लगता है जैसे सदियों पुरानी मोहब्बत और इतिहास फिर से जिंदा हो गया हो. यही वजह है कि हर साल ताजमहल उर्स लोगों को अपनी ओर खींच लेता है और यह सिलसिला आगे भी यूं ही चलता रहेगा.






