SC का बड़ा फैसला सजा पूरी होने पर भी जेल में बंद कैदियों को तुरंत रिहा करो

By Shiv

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a group of people walking through a gate

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों में सजा पूरी कर चुके कैदियों की तुरंत रिहाई का आदेश दिया है और कहा कि ऐसे बंदियों को जेल में रखना उनके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है.

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर प्रशासन का यही रवैया रहा तो दोषी जेल में ही दम तोड़ देगा और कोर्ट ने देशभर की जेलों में ऐसे सभी कैदियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है और जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं.

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मामला कैसे उठा

ये आदेश नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी सुखदेव पहलवान की याचिका पर आया है की उसकी 20 साल की सजा मार्च में ही पूरी हो चुकी थी पर रिहाई नहीं हुई तो मजबूर होकर उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि सजा पूरी होने के बाद कैदी को जेल में रखना व संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए सम्मानजनक जीवन के अधिकार का उल्लंघन है.

सिर्फ सजा पूरी करने वाले ही नहीं, जमानत वाले भी फंसे

यह समस्या सिर्फ सजा पूरी करने वाले कैदियों तक सीमित नहीं है यह इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर की जेलों में करीब 25 हजार कैदी ऐसे हैं जिन्हें जमानत मिल चुकी है पर शर्तें पूरी न होने की वजह से रिहाई नहीं हुई.

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सभी राज्यों को भेजा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों को भेजने को कहा है और साथ ही विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी निर्देश दिए हैं कि वो जांच करें कि कहीं कोई कैदी अपनी सजा से ज्यादा वक्त तो जेल में नहीं काट रहा है.

राज्यों का हाल

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जेल प्रशासन का दावा है कि उनके यहां ऐसा कोई कैदी नहीं है जिसकी सजा पूरी होने के बाद भी रिहाई रोकी गई हो और राजस्थान में फिलहाल इस पर जांच जारी है और वहीं छत्तीसगढ़ की जेलों में क्षमता से कहीं ज्यादा कैदी रखे गए हैं 14900 की क्षमता वाली जेलों में 20500 कैदी हैं.

जेल प्रशासन को भी फटकार

कोर्ट ने इस मामले में जेल और समीक्षा बोर्ड दोनों को फटकार लगाई है और दरअसल 29 जुलाई को ही कोर्ट ने सुखदेव पहलवान की रिहाई का आदेश दिया था पर बोर्ड ने आचरण का हवाला देकर रिहाई टाल दी और इस पर बेंच ने सवाल किया कि यह कैसा रवैया है जहां आदेश के बावजूद भी बंदी को जेल में रखा गया.

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