Mau SDM Attack Case 2025 – रास्ते के विवाद में महिलाओं से भिड़े अधिकारी, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

By Shiv

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Mau SDM Attack Case

Mau SDM Attack Case में रास्ते के विवाद को लेकर महिलाओं और उपजिलाधिकारी के बीच झड़प हो गई। Mau SDM Attack Case में पुलिस बल समय

Mau SDM Attack Case क्या है पूरा मामला

Mau SDM Attack Case की शुरुआत एक पुराने रास्ते के विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। उपजिलाधिकारी मधुबन राजेश अग्रवाल काठतराव गांव में एक रास्ते पर खड़ंजा निर्माण की स्थिति देखने पहुंचे थे। यह रास्ता कई सालों से विवादित बताया जा रहा है। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि यह सार्वजनिक मार्ग है, जबकि विरोध करने वाला परिवार इसे अपनी निजी भूमि बता रहा है।

इसी दौरान मौके पर मौजूद कुछ महिलाओं और उपजिलाधिकारी के बीच कहासुनी बढ़ गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि महिलाओं ने कथित तौर पर SDM का कॉलर पकड़ लिया। यह पूरा घटनाक्रम वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

महिलाओं के परिवार का पक्ष

Mau SDM Attack Case में अब दोनों पक्ष खुलकर सामने आ गए हैं। महिलाओं के परिवार की ओर से विजयशंकर तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस जमीन पर खड़ंजा लगाने की बात की जा रही है, वह उनकी निजी संपत्ति है। उनका दावा है कि यह मामला पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है।

विजयशंकर तिवारी का कहना है कि जब कोई मामला कोर्ट में चल रहा हो, तो बिना किसी अंतिम फैसले के वहां निर्माण कराना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान ने अधिकारियों को गुमराह करके निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया। इसी को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बनी।

मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार

Mau SDM Attack Case को लेकर विजयशंकर तिवारी ने यह भी कहा कि अब वे इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाएंगे। उनका कहना है कि प्रशासन को कोर्ट के आदेश का इंतजार करना चाहिए था। बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए जबरन काम कराने की कोशिश की गई, जिससे हालात बिगड़े।

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परिवार का यह भी कहना है कि महिलाओं को आगे करके कोई साजिश नहीं रची गई, बल्कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए मौके पर मौजूद थीं और भावनाओं में आकर स्थिति बिगड़ गई।

SDM का आरोप, पुलिस मूकदर्शक बनी रही

Mau SDM Attack Case में उपजिलाधिकारी राजेश अग्रवाल का बयान भी सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि महिलाओं द्वारा कॉलर पकड़ा जाना सच है। SDM के अनुसार, उन्होंने पहले ही मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस बल की मांग की थी, लेकिन समय पर पुलिस नहीं पहुंची।

राजेश अग्रवाल का आरोप है कि जब उनके साथ अभद्रता हो रही थी, उस वक्त मौके पर मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही। बाद में जब स्थिति हाथ से निकल चुकी थी, तब पुलिस बल पहुंचा। SDM का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मिल जाती, तो हालात इस हद तक नहीं पहुंचते।

रास्ते को लेकर प्रशासन का दावा

Mau SDM Attack Case में प्रशासन का पक्ष यह है कि जिस रास्ते को लेकर विवाद हो रहा है, वह ग्रामसभा का एकमात्र सार्वजनिक मार्ग है। इसी रास्ते से गांव के लोगों का रोजमर्रा का आवागमन होता है। SDM ने बताया कि इस मार्ग पर पहले भी तीन बार सरकारी धन खर्च हो चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसे सार्वजनिक मार्ग माना गया है।

उनका कहना है कि अगर किसी को आपत्ति है, तो कानूनी तरीके से अपनी बात रखी जा सकती है। इस तरह से महिलाओं को आगे करके विरोध करना और हाथापाई करना किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता।

CO ने दी सफाई

Mau SDM Attack Case में क्षेत्राधिकारी मधुबन अभय सिंह का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की पूर्व जानकारी नहीं थी। जैसे ही सूचना मिली, वे तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।

CO अभय सिंह ने यह भी कहा कि SDM उनके वरिष्ठ अधिकारी हैं और जब भी उन्हें पुलिस की आवश्यकता होगी, पूरा सहयोग दिया जाएगा। उनका दावा है कि सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई की और माहौल को शांत कराया।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल

Mau SDM Attack Case ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जमीनी विवादों में प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल क्यों नहीं बन पाता। अगर समय पर पुलिस बल तैनात होता, तो शायद यह घटना टल सकती थी।

सोशल मीडिया पर लोग इस मामले में अलग अलग राय रख रहे हैं। कुछ लोग महिलाओं के व्यवहार को गलत बता रहे हैं, तो कुछ लोग प्रशासन की जल्दबाजी और पुलिस की ढिलाई पर सवाल उठा रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है

Mau SDM Attack Case फिलहाल जांच और बयानबाजी के दौर में है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि रास्ता सार्वजनिक है या निजी और पुलिस की भूमिका पर क्या कार्रवाई होती है। यह मामला अब सिर्फ गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर चर्चा का विषय बन गया है।

कुल मिलाकर यह घटना एक सबक भी है कि बिना पूरी तैयारी और सुरक्षा के संवेदनशील मामलों में मौके पर जाना कई बार हालात बिगाड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले से क्या सीख लेता है और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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