Agra SN Medical डॉ. रमीज पर शिकंजा लगातार कस रहा है. यौन शोषण और मतांतरण केस में STF को एसएन मेडिकल कॉलेज से 13 साल का छात्र रिकॉर्ड मिल गया है
कॉलेज की फाइलों से खुलने लगी पुरानी परतें
Agra SN Medical डॉ. रमीज पर शिकंजा अब सिर्फ बयान और आरोपों तक सीमित नहीं है. जांच एजेंसियां सीधे कागजों और रिकॉर्ड के जरिए उसकी पिछली जिंदगी को खंगालने में जुट गई हैं. आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज से STF को जो 13 साल का रिकॉर्ड मिला है, उसने जांच की दिशा ही बदल दी है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि क्या हुआ, बल्कि यह है कि यह सब कब और कैसे शुरू हुआ.
STF ने क्यों टटोला 2012 से 2025 का समय
STF को शुरुआती जांच में यह समझ आ गया था कि डॉ. रमीज का मामला अचानक पैदा नहीं हुआ. कॉलेज के दिनों से ही उसके संपर्क, सोच और व्यवहार पर सवाल उठते रहे हैं. इसी वजह से STF ने 2012 से 2025 तक का पूरा छात्र रिकॉर्ड मांगा. डॉ. रमीज पर शिकंजा कसने के लिए यह जानना जरूरी था कि वह किन लोगों के बीच रहा और किनसे उसका गहरा जुड़ाव था.
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एसएन मेडिकल कॉलेज की भूमिका जांच में अहम
Agra SN Medical STF की टीम जब कॉलेज पहुंची तो सीधे-सीधे पूरा डेटा मांगा गया. कॉलेज प्रशासन ने भी जांच में कोई रुकावट नहीं डाली. MBBS, MD और MS के छात्रों का विस्तृत रिकॉर्ड STF को सौंप दिया गया. इसमें हॉस्टल से लेकर शैक्षणिक अवधि तक की जानकारियां शामिल हैं, जो अब जांच की बुनियाद बन रही हैं.
रिकॉर्ड बताते हैं कि डॉ. रमीज ने MBBS की शुरुआत कॉलेज के पास किराए के कमरे में रहते हुए की. बाद में वह हॉस्टल में शिफ्ट हो गया. हॉस्टल जीवन के दौरान किन छात्रों से उसका मेलजोल बढ़ा, STF अब उसी रिश्तों की परतें खोलने में लगी है. डॉ. रमीज पर शिकंजा यहीं से मजबूत होता दिखता है.
PG में असफलता के बाद भी क्यों बना रहा कॉलेज से नाता
PG में चयन न होने के बावजूद डॉ. रमीज कॉलेज से पूरी तरह अलग नहीं हुआ. कुछ समय बाद उसकी वापसी और जूनियर छात्रों के साथ रहना कई सवाल खड़े करता है. STF इसी बिंदु को बेहद गंभीरता से देख रही है. जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि उस दौर में उसका रोल क्या था और उसका असर किन पर पड़ा. Agra SN Medical
जांच में सामने आया कि डॉ. रमीज अकेला नहीं था. उसी बैच से जुड़ा एक और नाम, डॉ. परवेज, पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा है. दोनों का एक ही कॉलेज और एक ही समय से जुड़ाव जांच को और गहरा बना रहा है. डॉ. रमीज पर शिकंजा अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि नेटवर्क आधारित जांच में बदल चुका है.
व्हाट्सएप ग्रुप की भूमिका पर उठे सवाल
Agra SN Medical इस पूरे मामले में इस्लामिक मेडिकोज नाम का व्हाट्सएप ग्रुप STF के लिए अहम कड़ी बनकर उभरा है. एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि यह ग्रुप सिर्फ सामान्य बातचीत के लिए था या इसके पीछे कोई खास उद्देश्य था. पुराने रिकॉर्ड से STF उन छात्रों तक पहुंचना चाहती है जो इस ग्रुप में सक्रिय रहे.
रिकॉर्ड मिलने के बाद जांच ने बदली चाल
13 साल का डेटा मिलने के बाद STF की रणनीति बदल गई है. अब पूछताछ सिर्फ हालिया घटनाओं तक सीमित नहीं रहेगी. पुराने बैचमेट्स, हॉस्टल साथी और कॉलेज से जुड़े लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं. Agra SN Medical डॉ. रमीज पर शिकंजा अब धीमे लेकिन ठोस तरीके से आगे बढ़ रहा है.
STF किसी एक घटना को नहीं, बल्कि एक पूरे पैटर्न को समझना चाहती है. किस दौर में क्या बदला, किन लोगों से संपर्क बढ़ा और किस दिशा में सोच आगे बढ़ी, इन सबका जवाब रिकॉर्ड में छिपा हो सकता है. Agra SN Medical डॉ. रमीज पर शिकंजा इसी गहरी पड़ताल का नतीजा बनता दिख रहा है.






