nana patekar death news हिंदी सिनेमा में कई कलाकार आते हैं, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जिनकी अदाकारी दर्शकों के मन में हमेशा के लिए बस जाती है. नाना पाटेकर भी ऐसे ही कलाकारों में शामिल रहे.
अपने अलग अंदाज, दमदार आवाज और किरदारों में जान डाल देने वाली अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म जगत को गमगीन कर दिया है. 75 साल की उम्र में उनके दुनिया से चले जाने की खबर ने उन लोगों को भी भावुक कर दिया, जिन्होंने उन्हें पर्दे पर अलग-अलग भूमिकाओं में देखा और पसंद किया.
नाना पाटेकर के निधन के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई है. वहीं, महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने बताया कि अभिनेता को यह सम्मान मराठी रंगमंच के साथ हिंदी और मराठी फिल्मों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाएगा.
गोवा में बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में नहीं बच सकी जान
दी गई जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर गोवा स्थित अपने घर पर थे. बीती रात से उन्हें सिरदर्द की शिकायत हो रही थी. इसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह अचेत हो गए. उस समय उनके साथ उनके भतीजे प्रसाद पाटेकर मौजूद थे. परिवार ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशें काम नहीं आईं.
इस घटना ने उनके चाहने वालों को स्तब्ध कर दिया. नाना पाटेकर जैसे कलाकार को लोग उनकी फिल्मों और बेबाक अंदाज के लिए जानते थे. उनके अचानक चले जाने से उनके प्रशंसकों के मन में दुख है. उनके निधन की खबर सामने आने के बाद उनके अभिनय और समाज के लिए किए गए कामों की चर्चा भी होने लगी है.
देवेंद्र फडणवीस ने परिवार को दिया भरोसा
नाना पाटेकर के निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके बेटे मल्हार पाटेकर से फोन पर बातचीत की. उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया. महाराष्ट्र सरकार ने अभिनेता के अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ संपन्न कराने का निर्णय लिया.
यह फैसला बताता है कि नाना पाटेकर का योगदान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं माना गया. उन्होंने मराठी रंगमंच और हिंदी सिनेमा में अपनी कला से अलग पहचान बनाई. उनके अभिनय में जो गंभीरता और स्वाभाविकता दिखाई देती थी, उसने उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग स्थान दिलाया.
पुणे के फार्महाउस पर दी जाएगी अंतिम विदाई
सामने आई जानकारी के अनुसार, नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे के बाहरी इलाके में स्थित उनके डोंजे वाले फार्महाउस पर किया जाएगा. उनके पार्थिव शरीर को गोवा से पुणे लाने की तैयारी की गई थी. नाम फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गणेश थोरात के मुताबिक, पार्थिव शरीर को पुणे लाने के बाद लोगों को अंतिम दर्शन का अवसर दिया जाएगा. इसके बाद फार्महाउस परिसर में अंतिम संस्कार किया जाएगा.
नाना पाटेकर के प्रशंसकों के लिए यह भावुक पल होगा. जिस कलाकार ने अपने अभिनय से लोगों को कभी हंसाया, कभी रुलाया और कभी सोचने पर मजबूर किया, उसे अब लोग अंतिम विदाई देंगे. महाराष्ट्र सरकार की ओर से राजकीय सम्मान का फैसला उनके लंबे कलात्मक सफर को सम्मान देने के रूप में देखा जा रहा है.
आशीष शेलार ने बताया क्यों मिलेगा राजकीय सम्मान
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने नाना पाटेकर के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मराठी रंगमंच, मराठी फिल्मों और हिंदी सिनेमा को बहुत कुछ दिया. उनकी पहचान एक ऐसे कलाकार की रही, जो सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी बात साफ शब्दों में रखते थे.
नाना पाटेकर किसानों की परेशानियों को लेकर भी आवाज उठाते रहे. वह जरूरतमंद लोगों की मदद करने के साथ किसानों के मुद्दों पर सरकार के सामने अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटते थे. उनके व्यक्तित्व का यही पहलू उन्हें केवल एक अभिनेता से आगे ले जाता है.
‘क्रांतिवीर’ और ‘नटसम्राट’ जैसे किरदारों से मिली अलग पहचान
नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं. ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘वेलकम’, ‘टैक्सी नंबर 9211’ और मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में उनके काम को दर्शकों ने खूब पसंद किया. हर फिल्म में उनका अंदाज अलग दिखाई दिया. कहीं उन्होंने गंभीर भूमिका निभाई, तो कहीं अपने अभिनय से दर्शकों को मनोरंजन का भरपूर मौका दिया.
बदमाशों ने मचाया आतंक, पुलिस ने सड़कों पर घुमाकर सिखाया ऐसा सबक कि लोग बोले अब आया मजा
उनकी सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वह किरदार को केवल संवादों तक सीमित नहीं रखते थे. उनके चेहरे के भाव, बोलने का तरीका और पर्दे पर मौजूदगी कहानी को असरदार बना देते थे. इसी वजह से उनकी कई भूमिकाएं आज भी दर्शकों की यादों में बसी हुई हैं.
नाम फाउंडेशन के जरिए किसानों की मदद
नाना पाटेकर का सामाजिक काम भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा. उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन की स्थापना की. इस संस्था के माध्यम से महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में किसानों की मदद, जल संरक्षण और किसानों के बच्चों की शिक्षा जैसे कामों को आगे बढ़ाया गया.
किसानों की समस्याओं को लेकर उनकी चिंता केवल बातचीत तक सीमित नहीं रही. उन्होंने जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए काम करने का रास्ता चुना. यही वजह है कि उनके निधन से कला जगत के साथ सामाजिक क्षेत्र में भी उन्हें याद किया जा रहा है.
अभिनय और समाज सेवा के लिए याद किए जाएंगे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर की पहचान उनकी फिल्मों, दमदार संवादों और बेबाक व्यक्तित्व से बनी. उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई और सामाजिक कामों के जरिए जरूरतमंद लोगों की मदद करने का प्रयास किया.
उनके निधन से सिनेमा जगत ने एक अनुभवी कलाकार खो दिया है. उनकी फिल्में, उनके निभाए किरदार और किसानों के लिए किए गए प्रयास लोगों को उनकी याद दिलाते रहेंगे. राजकीय सम्मान के साथ होने वाली अंतिम विदाई उनके लंबे योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक होगी.






