Agra Jholachhap News आगरा में झोलाछाप इलाज की वजह से नवजात की नाभि से आंत बाहर आ गई. गलत चीरे से जानलेवा संक्रमण फैला. जानिए पूरा मामला.
झोलाछाप इलाज का खौफनाक चेहरा best doctor in agra for stomach
Agra Jholachhap News आगरा में एक बार फिर झोलाछाप इलाज का खौफनाक चेहरा सामने आया है. इस बार शिकार बना एक नवजात शिशु, जिसकी नाभि में मामूली सूजन को फोड़ा समझकर झोलाछाप ने ऐसा इलाज किया कि बच्चे की आंतें पेट से बाहर निकल आईं. मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं बल्कि सीधे तौर पर जानलेवा झोलाछाप इलाज का है, जिसने एक परिवार को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से तोड़ दिया है.
कैसे शुरू हुआ झोलाछाप इलाज का खतरनाक सिलसिला general physician near me
Agra Jholachhap News कटरा वजीर खां इलाके के रहने वाले नीतेश जयपुर में इलेक्ट्रॉनिक कांटे बेचने का काम करते हैं. परिवार आगरा में रहता है. 23 नवंबर को उनकी पत्नी रानी ने एक निजी अस्पताल में बेटे को जन्म दिया. शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ हफ्तों बाद नवजात की नाभि लाल होने लगी और हल्की सूजन दिखी.
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10 जनवरी की शाम नीतेश ने बच्चे को घर के पास ही दुकान चलाने वाले राकेश नाम के झोलाछाप को दिखा दिया. यहीं से झोलाछाप इलाज की असली तबाही शुरू हुई. झोलाछाप ने बिना किसी जांच के इसे फोड़ा बताया और नाभि पर सीधा चीरा लगा दिया.
झोलाछाप के चीरे से बाहर निकल आईं आंतें
Agra Jholachhap News चीरा लगाने के कुछ ही देर बाद बच्चे की नाभि से आंत बाहर निकल आई. रात भर हालत बिगड़ती गई. सुबह तक आंत का बड़ा हिस्सा पेट से बाहर आ चुका था. परिवार घबरा गया. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इतनी बड़ी अनहोनी कैसे हो गई.
तुरंत बच्चे को एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निजी अस्पताल में रेफर कर दिया. इसके बाद पुष्पांजलि हॉस्पिटल में नवजात को भर्ती कराया गया.
डॉक्टरों ने बताया झोलाछाप इलाज का असली नुकसान
पुष्पांजलि हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राहुल देव शर्मा के मुताबिक नवजात की हालत बेहद गंभीर थी. बच्चे को नाभि का हर्निया था. नाभि के पास की झिल्ली कमजोर थी, इसलिए लालिमा और सूजन दिख रही थी.
अगर समय पर सही डॉक्टर को दिखाया जाता, तो सर्जरी के बिना भी कई मामलों में इलाज संभव हो जाता. लेकिन झोलाछाप इलाज ने स्थिति को जानलेवा बना दिया. चीरा लगाने से आंत कट गई और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया.
जान बचाने के लिए करनी पड़ी बड़ी सर्जरी
डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की. आंत का जो हिस्सा कट गया था और जिसमें सड़न आ गई थी, उसे निकालना पड़ा. इसके बाद आंत को जोड़ा गया. बच्चे के पेट के रास्ते मल निकास के लिए कृत्रिम रास्ता यानी स्टोमा बनाना पड़ा.
Agra Jholachhap News यह सर्जरी बेहद संवेदनशील थी, क्योंकि मरीज एक नवजात था. फिलहाल बच्चा दूध पी रहा है और उसका वजन भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक आगे चलकर एक और सर्जरी करनी पड़ेगी ताकि कृत्रिम रास्ता बंद किया जा सके.
10 दिन अस्पताल और ढाई लाख से ज्यादा खर्च
Agra Jholachhap News नीतेश बताते हैं कि बच्चा करीब 10 दिन अस्पताल में भर्ती रहा. इलाज और दवाओं पर अब तक करीब 2.50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. शुक्रवार को बच्चे को डिस्चार्ज किया गया था, लेकिन घर ले जाने के बाद फिर से परेशानी शुरू हो गई.
नाभि के पास दिक्कत दोबारा बढ़ने लगी, जिसके बाद बच्चे को फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. परिवार मानसिक तनाव में है और आर्थिक बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है.
झोलाछाप इलाज पर सवाल और प्रशासन की जिम्मेदारी
Agra Jholachhap News यह मामला झोलाछाप इलाज की उस सच्चाई को उजागर करता है, जो अक्सर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को अपनी चपेट में ले लेती है. सस्ते इलाज के चक्कर में लोग ऐसे अवैध इलाजकर्ताओं के पास पहुंच जाते हैं, जिनके पास न तो डिग्री होती है और न ही जिम्मेदारी.
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने मामले को गंभीर बताया है. उन्होंने कहा है कि टीम भेजकर जांच कराई जाएगी और दोषी झोलाछाप पर कार्रवाई की जाएगी.






