Agra News Live: महाकुंभ में साध्वी बनी 13 साल की गौरी घर लौटी, मां बोली महंत कौशल गिरि ने बहकाया

By Vipin Singh

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Agra News Live महाकुंभ में साध्वी बनी 13 साल की गौरी घर लौट आई. परिवार का आरोप है कि महंत कौशल गिरि ने बच्ची को बहकाया था.

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Agra News Live – पिछले कुछ महीनों से महंत कौशल गिरि और साध्वी बनी 13 साल की गौरी का मामला लगातार चर्चा में रहा है। खबर आई थी कि आगरा की रहने वाली यह नाबालिग लड़की महाकुंभ में संन्यास लेकर जूना अखाड़ा की साध्वी बन गई थी।

Agra News Live – सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनलों तक यही बताया गया कि परिजनों ने अपनी बेटी को जूना अखाड़ा को दान कर दिया और महंत कौशल गिरि ने उसे दीक्षा दे दी। लेकिन अब यह पूरी कहानी उलट चुकी है और हर बयान के साथ एक नया सच सामने आ रहा है.

आगरा न्यूज़ चैनल महंत कौशल गिरि पर सवाल क्यों उठे

Agra News Live – जब महाकुंभ 2025 का आयोजन हुआ, उसी दौरान गौरी नाम की 13 वर्षीय बच्ची ने संन्यास ले लिया और उसका नाम साध्वी गौरी रखा गया। यह बात बाहर आते ही लोग हैरान रह गए। इतने कम उम्र में संन्यास, दीक्षा और परिवार से दूरी… स्वाभाविक था कि लोग सवाल पूछें। जूना अखाड़ा ने भी तुरंत जांच करवाई और महंत कौशल गिरि को अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

Agra News Live – अखाड़े का कहना था कि उन्होंने इस घटना की जानकारी समय रहते नहीं दी। इसी बीच बच्ची को आगरा के नारी निकेतन में भेज दिया गया था ताकि उसकी देखभाल सुरक्षित तरीके से हो सके.

नारी निकेतन से परिवार, फिर दोबारा गुरु के पास, और फिर पुलिस की दखल

Agra News Live – करीब 10 महीने की इस कहानी में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि 5 नवंबर को बच्ची को नारी निकेतन से उसके असली परिवार को सौंप दिया गया। सबको लगा अब मामला खत्म हो गया है, लेकिन 2–3 दिन बाद ही वह फिर से हरियाणा में महंत कौशल गिरि के पास पहुंच गई। इससे परिवार फिर परेशान हो गया और उन्होंने थाना ढौकी पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

Agra News Live – इसके बाद आगरा पुलिस हरियाणा पहुंची, बच्ची को रेस्क्यू किया और उसे वापस आगरा ले आई। काउंसलिंग शुरू की गई ताकि समझा जा सके कि बच्ची बार-बार गुरु के पास क्यों जा रही है। पुलिस की टीम ने शांतिपूर्वक बातचीत कर पूरी स्थिति समझी और उसे सुरक्षित तरीके से परिवार को सौंप दिया.

आगरा देहात न्यूज़ – परिवार का आरोप महंत कौशल गिरि ने बच्ची को बहकाया

Agra News Live – अब बच्ची की मां का बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने साफ कहा कि महंत कौशल गिरि ने उनकी बेटी को बहकाया था। उनका कहना है कि बच्ची अभी मासूम है, उसे सही-गलत की पूरी समझ नहीं है और इसी का फायदा उठाकर उसे दीक्षा दिलवा दी गई। मां ने कहा कि अब बच्ची घर पर है, सुरक्षित है और परिवार बेहद खुश है.

परिवार का यह भी कहना है कि बच्ची को लगातार मानसिक रूप से प्रभावित किया गया था, इसी वजह से वह नारी निकेतन से सीधे हरियाणा अपने गुरु के पास चली गई थी। हालांकि काउंसलिंग के बाद बच्ची पूरी तरह शांत और समझदार नजर आई और उसने स्पष्ट कहा कि अब वह अपने माता-पिता के साथ ही रहना चाहती है.

बच्ची ने खुद क्या कहा और महंत कौशल गिरि की भूमिका कितनी गंभीर

Agra News Live – काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने कहा कि वह अब पढ़ना-लिखना चाहती है। उसकी इच्छाएं बदल गई हैं और वह जीवन में कुछ करना चाहती है। उसने कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ रहेगी और आगे पढ़ाई कर देश का नाम रोशन करना चाहती है। इस बयान के बाद पुलिस और परिवार दोनों आश्वस्त नजर आए।

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महंत कौशल गिरि पर लग रहे आरोप गंभीर हैं क्योंकि मामला नाबालिग से जुड़ा है। हालांकि पुलिस अभी भी तथ्य जुटा रही है ताकि पता चले कि बच्ची किस परिस्थिति में संन्यास तक पहुंच गई थी। साफ है कि यह सिर्फ धार्मिक मामला नहीं बल्कि परिवार, समाज और नाबालिग के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है.

आगरा पुलिस की भूमिका और पूरे घटनाक्रम पर उनकी प्रतिक्रिया

Agra News Live – आगरा पुलिस ने शुरुआत से ही इस मामले को गंभीरता से लिया। नारी निकेतन भेजने, दोबारा रेस्क्यू करने, काउंसलिंग कराने और फिर बच्ची को परिवार के हवाले करने तक हर कदम सलीके से उठाया गया। पुलिस ने कहा कि बच्ची अब सुरक्षित है और उसके भविष्य को देखते हुए परिवार को ही उसकी जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्ची अब खुश है और उसकी इच्छा अपने घर रहने की है.

भविष्य में इस कहानी का समाज पर क्या असर पड़ेगा

महंत कौशल गिरि और साध्वी गौरी का यह मामला सिर्फ एक बच्ची की कहानी नहीं है। यह सवाल भी उठाता है कि नाबालिगों के धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने, संन्यास लेने या दीक्षा देने जैसे मामलों को लेकर क्या स्पष्ट नियम होने चाहिए। इस घटना ने कम से कम इतने तो दिखा दिया है कि समाज और परिवार को सतर्क रहना होगा और बच्चों की भावनाओं को समझकर ही निर्णय लेने होंगे.

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