Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 डिजिटल गिरफ्त में फंसे रिटायर्ड टीचर को बचा लिया बैंक ने

By Shiv

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Bank Digital Arrest Fraud Case 2025

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 बांदा में एक रिटायर्ड शिक्षक को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर 36 लाख रुपये ट्रांसफर करा दिए थे.

रिटायर्ड टीचर को फंसाया गया ‘डिजिटल अरेस्ट’ के झांसे में

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 में बांदा जिले में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने साइबर ठगों की नई चाल का पर्दाफाश कर दिया. एक रिटायर्ड शिक्षक को फर्जी कॉल कर ठगों ने कहा कि उनका नाम ड्रग्स तस्करी के एक गंभीर मामले में आया है. खुद को सीबीआई और दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताते हुए ठगों ने उन्हें डराया और कहा कि अब उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है.
शिक्षक को निर्देश दिए गए कि वे वीडियो कॉल पर बने रहें और किसी से बात न करें. डर के माहौल में उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई यानी करीब ₹36 लाख रुपये एक कथित “आरबीआई जांच खाते” में ट्रांसफर कर दिए.

Axis Bank की नज़र में आया शक, शुरू हुई कार्रवाई

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 जब शिक्षक के खाते से इतनी बड़ी रकम किसी अनजान खाते में जाने लगी तो Axis Bank के सिस्टम को यह ट्रांजेक्शन संदिग्ध लगा. शाखा प्रबंधक ने तुरंत साइबर थाना बांदा को सूचना दी कि एक ग्राहक के खाते से लगातार भारी रकम ट्रांसफर हो रही है. और सूचना मिलते ही साइबर थाना प्रभारी और उनकी टीम हरकत में आई. कुछ ही मिनटों में खाते को ट्रेस कर पूरा ट्रांजेक्शन रोक दिया गया.

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बैंक और पुलिस की सूझबूझ से बची जीवनभर की पूंजी

Axis Bank और साइबर थाना बांदा की त्वरित कार्रवाई से शिक्षक की पूरी रकम सुरक्षित कर ली गई. बैंक अधिकारियों ने फौरन ट्रांजेक्शन फ्रीज कराया, जबकि पुलिस ने ठगों के खातों को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू की. Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 के इस केस में बाद में जांच में यह साफ हो गया कि कॉल करने वाले लोग न तो किसी सरकारी एजेंसी से थे और न ही उनका कोई वैध पद था.

ऐसे ठगे गए शिक्षक

शिक्षक को सबसे पहले एक कॉल आया जिसमें कहा गया कि उनका नाम “संदीप कुमार” नामक व्यक्ति से जुड़े ड्रग्स तस्करी केस में पाया गया है. और ठगों ने उन्हें वीडियो कॉल पर आने को कहा और कहा कि अब वे जांच के अधीन हैं और इस बीच ठगों ने उन्हें कहा कि उनके बैंक खातों की जांच के लिए रकम ट्रांसफर करनी होगी और डरे हुए शिक्षक ने ठगों की बातों में आकर आरटीजीएस के जरिए पूरी रकम भेज दी.

पुलिस की त्वरित जांच और ठगों की पहचान

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 में अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के बाद जांच शुरू कर दी गई है और जिन मोबाइल नंबरों और खातों से ठगों ने संपर्क किया तो उन्हें ट्रेस कर लिया गया है. और साइबर टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कॉल किस लोकेशन से की गई थी. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह दिल्ली-नोएडा से ऑनलाइन ठगी कर रहा था.

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 आखिर यह डिजिटल अरेस्ट एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है जिसमें ठग सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को डराते हैं. वे कहते हैं कि आपका नाम किसी अपराध में आया है, और इसलिए जांच के लिए आपको वीडियो कॉल पर रहना होगा. फिर धीरे-धीरे डर का माहौल बनाकर पैसे अपने खाते में ट्रांसफर करवाते हैं. यह पूरी तरह से फर्जी प्रक्रिया होती है और कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई अवधारणा नहीं है.

ऐसे बचें डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर ठगी से

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी न तो कॉल पर और न ही व्हाट्सएप पर जांच करती है. अगर कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर पैसे मांगता है तो तुरंत कॉल काटें. ऐसी स्थिति में 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें. पर कई मामलों में समय पर सूचना देने से रकम को फ्रीज कर पीड़ित की धनराशि वापस मिल जाती है.

पुलिस और बैंक ने बढ़ाई जागरूकता

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 में बांदा जिले में लगातार ऐसे मामले सामने आने के बाद पुलिस और बैंक मिलकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं. गांवों और कस्बों में साइबर सुरक्षा को लेकर लोगों को समझाया जा रहा है. और बैंक ग्राहकों को बताया जा रहा है कि किसी अनजान लिंक, कॉल या वीडियो चैट पर विश्वास न करें और कोई भी बैंक डिटेल साझा न करें.

जनता के लिए सबक

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 में रिटायर्ड शिक्षक वाला यह मामला सबक देता है कि किसी कॉल या वीडियो चैट पर भरोसा करने से पहले जांच जरूरी है. अगर कोई अधिकारी बनकर धमकाए तो उसकी बातों में न आएं. और हर कॉल और मैसेज की सच्चाई परखें. याद रखें कि बैंक, सीबीआई या दिल्ली पुलिस कभी किसी व्यक्ति से पैसे नहीं मांगती.

बड़ी ठगी

Bank Digital Arrest Fraud Case 2025 में बांदा का यह मामला इस बात का उदाहरण है कि सतर्कता रखने से कितनी बड़ी ठगी रोकी जा सकती है. अगर Axis Bank के अधिकारी और साइबर थाना की टीम समय पर कार्रवाई न करते तो एक रिटायर्ड शिक्षक की जीवनभर की बचत ठगों के हाथ लग जाती. आज जरूरत है कि हर व्यक्ति जागरूक रहे, और किसी कॉल या वीडियो चैट पर भरोसा न करे और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करे.

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