मथुरा में हर गली में जमा झोलाछाप CMO की नजरें टेढ़ी होने की संभावना

By Shiv

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मथुरा में झोलाछाप डॉक्टरों के बारे में एक तस्वीर

मथुरा के कई इलाकों जैसे कोसीकलां, गोवर्धन, बरसाना और फरह जैसे कस्बों से मिल रही जानकारी के मुताबिक दर्जनों ऐसे झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहे हैं जिनके पास न तो MBBS की डिग्री है और न ही कोई फार्मेसी का लाइसेंस है कई तो इंजेक्शन और स्टेरॉइड देकर सीधा इलाज शुरू कर देते हैं.

स्टेरॉइड का अंधाधुंध इस्तेमाल बना रहा नई बीमारी की जड़

स्थानीय निवासियों का दावा है कि ये झोलाछाप न केवल बगैर परीक्षण के दवा दे रहे हैं बल्कि steroids का भी धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं जिससे मरीजों को शुरू में तो आराम जरूर मिलता है पर बाद में शुगर, लीवर डैमेज और इम्यून सिस्टम कमजोर होने जैसी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं.

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CMO कार्यालय ने मांगी रिपोर्ट

सूत्रों की मानें तो CMO कार्यालय मथुरा ने हाल ही में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से गैरपंजीकृत क्लीनिकों की जानकारी मांगी है और CMO साहब ने अधिकारियों को चेताया है कि जल्द रिपोर्ट नहीं आने पर सीधे निरीक्षण किया जाएगा और माना जा रहा है कि जुलाई के अंत तक कई झोलाछापों के खिलाफ बड़ा अभियान चल सकता है.

मेडिकल दुकानों के पीछे चल रहे क्लीनिक!

कई झोलाछाप तो मेडिकल स्टोर्स के पीछे छोटे-छोटे कमरों में अपनी ओपीडी चला रहे हैं और मरीज आते ही सीधे इंजेक्शन, ड्रिप और पेन किलर थमा दिए जाते हैं और वहां न कोई सैनिटाइजेशन है, न बेसिक मेडिकल प्रोटोकॉल पर हाल ही में बरसाना में एक महिला को गलत इंजेक्शन लगने से हालत गंभीर हो गई थी.

जानकारों की राय झोलाछाप बन रहे Rural Health का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर झोलाछाप डॉक्टर फल-फूल रहे हैं और गरीब जनता सस्ते इलाज के नाम पर अपनी जान दांव पर लगा रही है और यह कहना है की एक रिटायर्ड डॉक्टर का जो इस मुद्दे पर लंबे समय से लिखते आ रहे हैं.

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